Tuesday, October 26, 2021

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बीएचयू प्रवेश परीक्षा में क्या गड़बड़ी की? अभ्यर्थी ने बता दिया

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) यानी वो संस्था जो देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन करती है। इन दिनों एनटीए का खूब विरोध हो रहा है। एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के चलते खूब सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार को देश भर के नौजवानों ने ट्विटर पर एनटीए के विरोध में हैशटैग ट्रेंड चलाया। #boycuttnta.

एनटीए के बॉयकट वाले हैशटैग के साथ एक और हैशटैग चलाया जा रहा है। #CancelBHUEntrance. ये दोनों हैशटैग जुड़े हुए हैं। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस साल एनटीए ने ही किया है। बीएचयू की प्रवेश परीक्षाओं से लगातार हो रही गड़बड़ियों की खबरें सामने आई है। एडमिट कार्ड देरी से आने और परीक्षा प्रश्न पत्र के प्रारूप को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध किया है।

अभ्यर्थी ने बताई सच्चाई:

खबर तक Media ने इस पूरे मुद्दे पर इस साल बीएचयू की प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले एक अभ्यर्थी अभिषेक से बात की। अभिषेक ने इस बार बीएससी (कृषि) के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी। अभिषेक ने बताया कि उनकी प्रवेश परीक्षा 6 अक्टूबर को थी। परीक्षा केंद्र बीएचयू के ही विज्ञान संकाय में ही थी।

अभिषेक ने कहा कि “परीक्षा से सिर्फ एक दिन पहले (5 अक्टूबर को) मेरा एडमिट कार्ड आया। इसी दिन रात साढ़े नौ बजे मुझे एक मैसेज आया। जिसमें बताया गया कि मेरी परीक्षा सीबीटी मोड में नहीं बल्कि ओएमआर शीट पर होगी। एडमिट कार्ड देरी से आने और अचानक ओएमआर शीट पर परीक्षा होने की जानकारी मिलने से काफी मानसिक तनाव हुआ।”

5 अक्टूबर की रात अभिषेक को मिला ये मैसेज। (बीच में ओएमआर कोड है जिसे धुंधला कर दिया गया है।)

अभिषेक परीक्षा के दौरान हुई गतिविधियों पर कहते हैं कि “मेरे सेंटर पर ओएमआर शीट भरने के लिए 7:55 पर दिया गया। इसमें ढेर सारी जानकारियां भरनी होती है। गोले भरने में काफी समय लगता है। दस से पंद्रह मिनट का वक्त अनुक्रमांक वगैरह भरने में चला गया। जबकि 8:00 से ही परीक्षा शुरू हो जानी थी।”

“परीक्षा खत्म होने के दस मिनट पहले से ही निरीक्षक (Invigilator) हमें सारी फॉर्मेलिटी समझाने लगें। ओएमआर शीट को अलग करने के बारे में वो बता रहे थे। इस चक्कर में भी समय की बर्बादी हुई।” ये बताते हुए अभिषेक प्रश्न पत्र के प्रारूप पर कहते हैं कि “एनटीए ने बिल्कुल भी पैटर्न फॉलो नहीं किया था। आउट ऑफ सिलेबस टाइप सवाल दिए गए थे। अचानक इस तरह के बदलाव होने से काफी दिक्कतें हुईं।”

गौरतलब है कि मानव संसाधन मंत्रालय ने तीन साल पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाई थी। नवंबर 2017 में एनटीए को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। एनटीए का गठन देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन फिलहाल एनटीए नौजवानों के लिए सिर दर्द बना हुआ है।

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