Thursday, December 9, 2021

एंबुलेंस से पर्दा उठाने वाले जाप अध्यक्ष पप्पू यादव हुए गिरफ्तार, क्या है असली वजह?

जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद पप्पू यादव गिरफ्तार हो गए। 11 मई यानी आज पप्पू यादव को पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया। जानकारी के मुताबिक पुलिस उन्हें पटना के गांधी मैदान पुलिस थाना लेकर गई है। पप्पू यादव पर तालाबंदी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। लॉकडॉउन तोड़ने के लिए पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है।

पप्पू यादव के गिरफ्तारी की वजह आधिकारिक तौर पर तालाबंदी बनी है। लेकिन इसके पीछे की हकीकत कुछ और ही है। पप्पू यादव पिछले एक हफ्ते से नीतीश सरकार की पोल खोल रहे थे। छपरा एम्बुलेंस प्रकरण को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए थे। उन्होंने ही भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के कार्यालय पर दो दर्जन से अधिक एम्बुलेंस खड़े होने का भंडाफोड़ किया था। पप्पू यादव खुद ने खुलासा किया था कि सांसद निधि से खरीदी गईं लगभग दो दर्जन एम्बुलेंस राजीव प्रताप रूडी के कार्यालय पर जंग खा रही हैं।

छपरा एम्बुलेंस प्रकरण:

बिहार के छपरा जिले में एक जगह है अमनौर। अमनौर में राजीव प्रताप रूडी का एक कार्यालय है। इसी कार्यालय पर लगभग 25 एम्बुलेंस खड़े और ढके हुए पाए गए। ये सभी एम्बुलेंस सांसद फंड यानी जनता के पैसे से खरीदे गए हैं। पप्पू यादव खुद ही रूडी के अमनौर कार्यालय पहुंच गए थे। तब इस एम्बुलेंस की जमाखोरी का खुलासा हुआ था। इसके बाद राजीव प्रताप रूडी ने कहा था कि ड्राइवर की कमी के कारण एम्बुलेंस खड़ी हैं। इस पर पप्पू यादव अपने साथ 30 वाहन चालकों को लाइसेंस के साथ ले आए। जाहिर है कि इन सब से भाजपा के कद्दावर नेता राजीव प्रताप रूडी की जग हंसाई हो रही थी। साथ बिहार की नीतीश सरकार पर सवाल उठ रहे थे।

इन सब को रोकने के लिए ही तालाबंदी के नियमों की आड़ में पप्पू यादव की आज गिरफ्तारी हुई। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के दौरान पप्पू यादव लगातार सक्रिय रहे हैं। पप्पू यादव ने बढ़चढ़कर लोगों की मदद की है। अस्पताल में भर्ती से लेकर ऑक्सीजन और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई हैं। ट्विटर पर उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। पचास हजार से अधिक लोगों ने पप्पू यादव की रिहाई के लिए ट्वीट किया है।

छवि या जनता कौन है जरूरी:

सवाल है कि राजीव प्रताप रूडी ने अपने कार्यालय पर इतनी बड़ी संख्या में एम्बुलेंस क्यों खड़ी रहने दी? जबकि बिहार में मरीजों को एम्बुलेंस नसीब नहीं हो रही है। जनता के पैसे से एम्बुलेंस खरीदी गई। लेकिन जनता ही एम्बुलेंस की कमी से तड़पती रही। ठेला, साइकिल और पीठ पर लादकर लोग अपने मरीजों को अस्पताल ले जाने पर मजबूर हैं। क्या यह अपराध नहीं है? क्या अब तक राजीव प्रताप रूडी पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी? क्या राजीव प्रताप रूडी से सवाल नहीं होने चाहिए कि आखिर लगभग 25 से अधिक एम्बुलेंस उनके कार्यालय पर क्यों सड़ रही थीं? इन सब के बजाए बिहार सरकार पप्पू यादव को गिरफ्तार करने में फंसी हुई है। ऐसा लगता है कि नीतीश सरकार के लिए अपनी छवि ज्यादा जरूरी हो चुकी है!

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