बीएचयू के रेजीडेंट डॉक्टरों के खिलाफ एनएसयूआई का प्रदर्शन, क्या है पूरा बखेड़ा?

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बीएचयू में रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल के खिलाफ प्रदर्शन करते एनएसयूआई कार्यकर्ता
बीएचयू में रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल के खिलाफ प्रदर्शन करते एनएसयूआई कार्यकर्ता

वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बुधवार को बीएचयू के सिंह द्वार पर एनएसयूआई ने प्रतिरोध सभा का आयोजन किया। मांग की गई है कि जल्द से जल्द इस हड़ताल को समाप्त कराया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित ना हों।

आरोप है कि “अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टरों के हड़ताल की वजह से आपातकालीन सेवा बंद पड़ी है। जिसके चलते मरीजों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।” कई मरीजों के जान गंवाने का दावा भी किया गया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि “हम डॉक्टरों की मांग के खिलाफ नहीं है। लेकिन इस तरह की अलोकतांत्रिक हड़ताल पूरी तरह अमानवीय है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी है।”

एनएसयूआई बीएचयू इकाई के अध्यक्ष राणा रोहित ने कहा कि “पिछले दस दिनों से चल रहे इस हड़ताल को खत्म कराने के लिए शासन और प्रशासन की तरफ से कोई कोशिश नहीं की जा रही है। इससे यह प्रतीत होता है कि यह पूरी हड़ताल भाजपा सरकार द्वारा पोषित है।”

सिंह द्वार के सामने प्रदर्शन करते एनएसयूआई कार्यकर्ता

प्रदर्शन के दौरान सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से यह मांग की गई है कि जल्द से जल्द पूरी हड़ताल बंद कराई जाए। ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से बहाल किया जाए। एनएसयूआई ने मांग की है कि अगर डॉक्टरों द्वारा अपना हड़ताल समाप्त नहीं किया जाता है तो उन पर एस्मा और महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।

क्यों हो रहा है हड़ताल:

बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के रेजीडेंट डॉक्टर पिछले दस दिनों से हड़ताल कर रहे हैं। दरअसल नेट-पीजी की काउंसिलिंग में हो रही देरी को लेकर फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने देश भर के जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल करने का आह्वान किया था। जिसके बाद ये बवाल कट हुआ है।

बीएचयू अस्पताल में हड़ताल पर बैठे रेजीडेंट डॉक्टर (फोटो साभार: अमर उजाला)

जूनियर डॉक्टर हड़ताल के बावजूद बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के आपातकालीन व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन गत मंगलवार यानी सात दिसंबर से यहां भी काम बंद कर दिया गया। बता दें कि इस हड़ताल के बाद बीएचयू के वरिष्ठ रेजीडेंट्स और वरिष्ठ डॉक्टर मोर्चा संभाले हुए हैं।

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बीएचयू आईएमएस के निदेशक और मेडिसीन संकाय के प्रमुख की ओर से गत दो दिसंबर को एक नोटिस जारी किया गया था। जिसमें रेजीडेंट डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की गई थी। उन्होंने कहा था कि “सर सुंदरलाल चिकित्सालय एवं ट्रॉमा सेंटर एक बड़ी आबादी की चिकित्सा जरूरतें पूरी करता है। जिसमें रेजीडेंट डॉक्टरों की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में रेजीडेंट डॉक्टरों का चिकित्सालय की सेवाओं से अलग रहना मरीजों को समय पर चिकित्सा मिलने के उनके अधिकारों से वंचित करता है।”

हालांकि इसके बावजूद ये हड़ताल अभी खत्म नहीं हो सका है। रेजीडेंट डॉक्टरों की मांग जायज है। लेकिन उनके हड़ताल की वजह से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। अस्पताल में इलाज को लेकर अव्यवस्था फैल चुकी है। देखना होगा कि हालात कब तक सामान्य होते हैं। सिंह द्वार पर आज हुए प्रदर्शन में वंदना उपाध्याय, जंग बहादुर, प्रशांत पाण्डेय, निशांत, शंभू कनौजिया, लेखराज, विवेक टंडन, कपिश्वर, शांतनु, अभिनव मणि त्रिपाठी, जय प्रकाश, अंशु, अमरेंद्र धर्मेंद्र पाल समेत कई एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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