छात्र नेता क्यों बनारस में PM मोदी का करने वाले हैं विरोध, आत्मदाह की चेतावनी!

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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (फाइल फोटो)
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (फाइल फोटो)

हात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्र संघ चुनाव की तैयारी जोरों पर है चुनाव अधिकारी भी नियुक्त कर दिये गये हैं। विश्वविद्यालय भी चुनाव कराने के मूड में है। लेकिन अब एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। तारीख घोषित किए जाने की मांग को लेकर। छात्र नेताओं की मांग है कि जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाए। मांग ये भी है कि 22 दिसंबर के पहले ही छात्र संघ चुनाव संपन्न कराए जाएं। मंगलवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के द्वार पर गेट बंद कर कुछ छात्र नेताओं ने धरना भी दिया।

दरअसल अब तक हजारो रुपये खर्च कर छात्र राजनीति में पेंच लड़ा रहे छात्रों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है वहीं दूसरी ओर मझे हुए चुनावी मठाधीशों की साख पर भी बट्टा लग रहा है।
इसीलिये 2021-22 के छात्र संघ चुनाव की तैयारी में लगे छात्रों ने प्रशासनिक भवन के गेट पर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द छात्रसंघ चुनाव की तारीख तय करे। बता दें कि छात्र नेताओं के दबाव के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले दिनों मनोविज्ञान विभाग के प्रो. आर.पी. सिंह को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है।

विश्वविद्यालय के ही एक छात्रनेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है कि अगर 22 दिसंबर के पहले छात्र संघ का चुनाव नहीं कराया जाता है तो वह आत्मदाह कर लेगा। बताया है जा रहा है कि इस छात्र की उम्र की समय सीमा 22 दिसंबर को ही 22 वर्ष पूरे होने के चलते लिंगदोह नियम के मुताबिक पार कर जा रही है। अत: वह छात्र चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो सकता है। लिंगदोह के नियमानुसार तय उम्र सीमा पार करने बाद कोई भी विद्यार्थी छात्र संघ का चुनाव नहीं लड़ सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री व बनारस के सांसद 13 दिसंबर को अपने संसदीय क्षेत्र काशी आ रहे हैं। जिला प्रशासन उनके आगमन की तैयारियों में जी जान से जुटा है। खासकर पुलिस महकमे में कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर खूब माथा पच्ची चल रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि “अगर विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं करता है तो प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का विरोध किया जाएगा।” देखना होगा कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं?

पुलिस अफसर चुनाव अधिकारी की बात सुनने को राजी नहीं:

जिला प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन में मंगलवार को एक दौर की हुई बातचीत नाकाम रही। बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चार प्रतिनिधि जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात करने गए थे वहां बातचीत में पुलिस अधिकारियों के रवैए से नाखुश होकर एक प्रोफेसर उखड़ गये बाद में समझा-बुझाकर शांत किया गया।

पुलिस अफसर भी अड़े रहें कि फिलहाल प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अलावा और किसी मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की जा सकती। बातचीत बेनतीजा साबित हुई और प्रोफेसर के जत्थे को बैरंग लौटना पड़ा। जब यह बात छात्रों को पता चली तो उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया क्योंकि सवाल उनके राजनीतिक भविष्य का है।

चुनाव अधिकारी प्रो. आर.पी. सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय दिसंबर में ही चुनाव कराने के पक्ष में है लेकिन जिला प्रशासन सुरक्षा बल मुहैया कराने में असमर्थता जाहिर कर रहा है। उन्होने कहा कि हम बिना सुरक्षा बल भी चुनाव कराने के बारे में विचार कर रहे हैं। बशर्ते सभी प्रत्याशियों को हिंसा न होने की लिखित शपथ पत्र देनी होगी और यदि हिंसा हुई तो चुनाव रद्द कर दिया जायेगा। जिला प्रशासन भी इस पर सहमत है।

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