Thursday, December 9, 2021

कुलपति की विशेष कृपा हिंदी विभाग पर, एक और प्रोफेसर को दी गई बड़ी जिम्मेदारी

तारीख है 20 नवंबर और दिन है शनिवार। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आज फिर एक बड़ा बदलाव हुआ है। हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग के प्रोफेसर अनुराग कुमार को मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान का नया निदेशक बनाया गया है। अब तक मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के निदेशक थे प्रो. ओमप्रकाश सिंह।

प्रो. ओमप्रकाश सिंह आगामी 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने इसे देखते हुए हिंदी विभाग के प्रो. अनुराग कुमार को पत्रकारिता संस्थान का निदेशक बना दिया है। प्रो. अनुराग कुमार अगले तीन सालों तक या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।

हिंदी विभाग के प्रो. अनुराग कुमार के पास मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के निदेशक के अलावा भी विश्वविद्यालय के कई बड़े पद हैं। प्रो. अनुराग कुमार त्यागी के कुलपति बनने के बाद उन्हें छात्रावास का मुख्य गृहपति यानी चीफ वार्डन बनाया गया। प्रो. अनुराग उड़ाका दल के प्रमुख भी हैं। निदेशक बनने के बाद अब उनके कंधों पर ये तीसरी बड़ी जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के नए कुलपति के आगमन के बाद हिंदी विभाग के प्रोफेसरों की जिम्मेदारी इन दिनों बढ़ी हुई है। कुलपति प्रो. त्यागी की विशेष कृपा हिंदी विभाग पर बरस रही है। कुलपति बनने के बाद प्रो. त्यागी ने अपनी एक नई टीम बनाई। कुलसचिव, कुलानुशासक से लेकर छात्रावास के मुख्य गृहपति तक बदल दिए गए।

विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. संतोष कुमार गुप्ता थे। उन्हें हटाकर हिंदी विभाग के प्रो. निरंजन सहाय को चीफ प्रॉक्टर बना दिया गया। जबकि प्रो. निरंजन सहाय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष भी हैं। इस लिहाज से प्रो. निरंजन सहाय एक शिक्षक, विभागाध्यक्ष और चीफ प्रॉक्टर की भूमिका निभा रहे हैं। यानी व्यक्ति एक और अलग-अलग तीन कार्य।

कुलपति ने छात्रावास के मुख्य गृहपति डॉ. विनोद कुमार सिंह की भी छुट्टी कर दी। चीफ वार्डन का यह पद थमाया गया एक बार फिर हिंदी विभाग के प्रो. अनुराग कुमार को। उन्हें विश्वविद्यालय के उड़ाका दल का प्रमुख भी बनाया गया। अब प्रो. अनुराग को मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान के निदेशक की भी जिम्मेदारी दे दी गई है।

सवाल ये है कि आखिर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. त्यागी को हिंदी विभाग से ऐसा क्या लगाव है? बातचीत के दौरान अमूमन अंग्रेजी में बात करने वाले प्रो. त्यागी को हर बड़ी जिम्मेदारी को सौंपते हुए हिंदी विभाग ही क्यों दिखता है? क्या विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में योग्य प्रोफसर नहीं हैं? क्या इसकी वजह हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. निरंजन सहाय की कुलपति से निकटता है? प्रो. त्यागी द्वारा कुलपति का कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ही प्रो. निरंजन सहाय को उनका करीबी माना जाता है।

विश्वविद्यालय में अक्सर प्रो. निरंजन सहाय के कुलपति कार्यालय में पैठ की चर्चा होते रहती है। इस चर्चा को बल तब मिला जब हिंदी विभाग के प्रो. निरंजन सहाय को अचानक विश्वविद्यालय का चीफ प्रॉक्टर बना दिया गया। जब एक के बाद एक हिंदी विभाग के प्रोफेसरों को बड़ी जिम्मेदारीयां मिलने लगीं तब भी यह चर्चा अंदरखाने तेज हो गई।

बड़ा सवाल ये है कि किसी एक ही प्रोफेसर को तीन-तीन पद क्यों सौंपे जा रहे हैं? पूरे विश्वविद्यालय में एक ही विभाग का बोलबाला क्यों? विश्वविद्यालय के अन्य विभागों को प्रशासनिक पदों में प्रतिनिधित्व क्यों नही दिया जा रहा है? बहरहाल देखने वाली बात होगी कि कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी और कौन से पद हिंदी विभाग के किसी प्रोफेसर के हवाले करते हैं?

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